चांदनी रात में लम्हे सिर्फ हसीन नही होते,जीवन में दुख के आगमन से जिंदगी रंगहीन नही होती।

दर्द सहन ना कर सकी आंसुओं को पीछा छोड़ दुनिया से रुखसत होने को चली थी मैं,”आज़ाद हूं अब हर दर्द से” यह ख्याल ना जाने क्यों ले उड़ चली थी मैं।

कोई रोको उसे मेरी रूह कि आवाज़ नहीं पहुंच रही क्या?जीवन तो खेल था ही अब मौत भी तमाशा बन चली क्या?मैं देख रही थी अपने जिस्म के साथ ज्याद्दती होते हुए,हयात आंसू देखें होंगे तुमने क्या देखा है एक रूह को रोते हुए? मेरी रूह तड़पती रही रोती रही देख अपने मृत जिस्म के साथ जब वो बलात्कार करते गए,जब रात के अंधेरे में सब सो रहे थे वो अस्पताल में मेरे मृत जिस्म के साथ खिलवाड़ करते गए।

वो भयानक दृश्य देख आंखें खुली और बस अश्कों का झरना बह सा गया,” सायमा ” सोच में गुम सी थी के एक बुरा ख्वाब मेरी मौत के डर का ऐसा बड़ा सबब जो बन गया।

– सायमा फ़िरदौस

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